बिनसिरि (सगत गढ़वाली-कुमाउनी) काव्य संकलन का लोकार्पण DPMI में हुआ

बिनसिरि (सगत गढ़वाली-कुमाउनी) काव्य संकलन का लोकार्पण DPMI में हुआ

रावत डिजिटल (बुक पब्लिशिंग हाउस)
प्रेस विज्ञप्ति।
नई दिल्लीः 8 नवम्बर, 2020 को दिल्ली पैरामेड़ीकेल एण्ड मैनेजमेंट इन्टीट्यूट सभागर, न्यू अशोक नगर, दिल्ली में रावत डिजिटल (बुक पब्लिशिंग हाउस) द्वारा प्रकाशित गढ़वाली एवं कुमाउनी भाषा के लगभग तीन सौ  से अधिक रचनाकारों के साझा कविता संग्रह “बिनसरि” का लोकार्पण हिन्दी, संस्कृत एवं गढ़वाली-कुमाउनी-जौनसारी भाषा अकादमी के सचिव डाॅ जीतराम भट्ट, डीपीएमआई के चेयरमैन एवं समाजसेवी, भाषा संरक्षक डाॅ बिनोद बछेती, सुप्रसि़द्ध साहित्यकार, चिटठी-पत्री पत्रिका के सम्पादक एवं सिनेअभिनेता श्री मदन मोहन डुकलाण, सुप्रसिद्ध समाजसेवी, भाषा प्रेमी श्री दिग्मोहन नेगी एवं उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली के संयोजक एवं साहित्यकार श्री दिनेश ध्यानी, रावत डिजिटल के प्रकाशक, बिनसरि के सम्पादक मण्डल के सदस्य  श्री अनूप सिंह रावत, श्री आशीस सुन्दरियाल, श्रीमती रामेश्वरी नादान आदि द्वारा किया गया।
बिनसरि कविता संग्रह पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री मदन मोहन डुकलाण ने कहा कि गढ़वाली-कुमाउनी साहित्यकारों की साझा कविता संग्रह पचास के दशक से चली आ रही परम्परा में एक और कड़ी जोड़ती है। युवा प्रकाशक एवं सम्पादक मण्डल ने बहुत मेहनत की है। ऐसे युवाओं से ही आने वाले समय में हमारी भाषाएं पोषित एवं संरक्षित होंगी।
दिल्ली में गढ़वाली-कुमाउनी-जौनसारी भाषा अकादमी के गठन की मुख्य धुरी रहे डाॅ जीतराम भट्ट ने कहा कि गढ़वाली-कुमाउनी-जौनसारी भाषाओं के सतत विकास के लिए दिल्ली में इन भाषाओं के लिए अकादमी प्रतिबद्ध है। बस कोरोना काल की जल्दी समाप्ति हो और अकादमी सुचारू रूप से पुनः कार्य शुरू कर सके। बहुत सारे कार्य होने हैं। उन्हौंने कहा कि दिल्ली में उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच लगातार भाषा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। जो कि हमारी भाषाओं के लिए अच्छी बात है और अब रावत डिजिटल प्रकाशन भी इस क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उम्मीद है कि उत्तराखण्ड में भी हमारी भाषाओं के विकास के लिए अच्छी पहल होगी।
डीपीएमआई के चेयरमैन डाॅ बिनोद बछेती ने कहा कि बिनसरि हमारी भाषाओं के लिए एक नई सुबह लेकर आई है। हम सबको प्रयास करना है कि हमारी गढ़वाली, कुमाउनी भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हों एवं हमारी नई पीढी अपनी भाषा और सरोकारों से जुडे और उनका संरक्षण करे। उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहा है।
सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री दिग्मोहन सिंह नेगी ने कहा कि रावत डिजिटल प्रकाशन के माध्यम से प्रकाशित बिनसरि कविता संग्रह ने दिल्ली एनसीआर में कोरोनाकाल में देश और विदेश में रह रहे उत्तराखण्ड के लगभग तीन सौ से अधिक लोगों की कविताओं को एक ग्रंथ के रूप में छापकर बहुत सराहनीय कार्य किया है।
गढ़वाली एंव कुमाउनी भाषा के साहित्यकार एवं बिनसरि कविता संग्रह के सह-सम्पादक, संकलन मण्डल के सदस्य श्री रमेश हितैषी ने कहा कि हमारी भाषाओं के साहित्यकारो को एक मंच पर लाकर रावत डिजिटल प्रकाशन ने बहुत अच्छा कार्य किया है। मैं भी इस टीम का सदस्य हूं यह मेरे लिए गर्व की बात है।
युवा कवि, भाषा पर गहरी पकड़ रखने वाले युवा व बिनसरि कविता संग्रह के सम्पादक श्री आशीष सुन्दरियाल ने कहा कि बिनसरि की परिकल्पना श्री अनूप सिंह रावत की है और उन्होंने जब मुझे बताया तो मुझे बहुत ही अच्छा विचार लगा और तब हमने इस कार्य को मूर्त रूप देना शुरू किया। हमने जहां इस संकलन में नब्बे वर्ष के वरिष्ठ साहित्यकार महाकवि श्री प्रेमलाल भट्ट जी की कविता को भी स्थान दिया है तो सुदूर गांव में कक्षा आठ-नौ के छात्र-छात्राओं की कविताओं को भी स्थान दिया है। जब ये पीढियां एक दूसरे की कविताओ को पढेंगी तो लगेगा कि कविता कितने समय से अनवरत लिखी जा रही है।
युवा कवि एवं बिनसरि कविता संग्रह के सम्पादक मण्डल, संकलन के सदस्य श्री सन्तोष जोशी ने कहा कि बिनसरि युवाओं को लेखन के प्रति जागरूक करने का एक सफल माध्यम है और हमें भी खुशी हुई कि गढ़वाली-कुमाउनी भाषाओं के कवियों को एक साथ एक पुस्तक में स्थान मिला है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच के संयोजक, साहित्यकार श्री दिनेश ध्यानी ने कहा कि बिनसरि बहुत ही संग्रहणीय ग्रंथ है। इसमे न सिर्फ गढ़वाळी, कुमाउनी कवियों की कविताये हैं बल्कि तीन सौ से अधिक साहित्यकारों के पते और सम्पर्क सूत्र भी हैं। जिससे भविष्य में लोगों को आपसे में जुडे रहने में सुविधा होगी। श्री ध्यानी ने कहा कि हमारी गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने और पाठकों एवं समाज  को अपनी भाषाओं के प्रति जागरूक करने के लिए निकट भविष्य में दिल्ली में एक दो दिवसीय साहित्य सम्मेलन एवं पुस्तक मेले का आयोजन किया जायेगा।
युवा कवि, रावत डिजिटल प्रकाशन के प्रकाशक एवं बिनसरि कविता संग्रह के सम्पादक श्री अनूप सिंह रावत ने सभी लोगोें का धन्यवाद करते हुए कहा कि पहले जब हमने इस किताब पर विचार किया और लोगों से सम्पर्क किया तो कई लोगों को विश्वास नही हुआ। उनका कहना है कि कई लोगों ने हमसे हमारी कविता मांगी लेकिन किताब नही छपी। लेकिन आज जब हमने ये कर दिखाया तो लोगों का हम पर विश्वास भी बढ़ा है और हमारे काम का आप लोग आकलन भी करेंगे कि कैसा किया है। हो सकता है कि कुछ त्रुटियां भी रह गई होंगी जो समय के साथ साथ सुधार दी जायेंगी लेकिन फिर भी हमने प्रयास किया कि अच्छा से अच्छा हम दे सकें। बिनसरि के प्रकाशन में सहयोग कि लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी श्री संजय शर्मा दरमोड़ा, डीपीएमआई के चेयरमैंन डाॅ बिनोद बछेती, समाजसेवी एवं गजल गायक श्री अशोक जोशी, वॉइसऑफ़ माउण्टेन के संयोजक श्री जगमोहन जिज्ञासु, सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री दिग्मोहन सिंह नेगी आदि का भी श्री रावत ने आभार व्यक्त किया।
ज्ञातव्य हो कि रावत डिजिटल प्रकाशन पिछले वर्ष फरवरी से प्रकाशन के क्षेत्र मे कार्य कर रहा है और लगभग बीस पुस्तकों का प्रकाशन कर चुका है। गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी एवं रंवाल्टी भाषा प्रेमियों के लिए यह बहुत ही गर्व की बात है।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री ललित केशवान, श्री पयाश पोखड़ा, श्री जगमोहन सिंह रावत, श्री जयपाल सिंह रावत छिप्वडु दा, अगस्त मुनि से श्री आचार्य श्री कृष्णानन्द नौटियाल, श्री चन्दन प्रेमी, श्री दर्शन सिंह रावत, डाॅ सतीश कालेश्वरी, श्रीमती रूचि जैमल, सार्बभौमिक संस्था के संयोजक श्री अजय सिंह विष्ट, श्री भगवती प्रसाद जुयाल गढ़देशी, श्री कुंज बिहारी मुण्डेपी कळजुगी,  श्री ओम प्रकाश आर्य, श्रीमती लक्ष्मी नौड़ियाल, श्रीमती विजय लक्ष्मी भट्ट, श्री बीरेन्द्र जुयाल उपरि, यूके टाईम से श्रीमती यशोदा जोशी, श्री विमल सजवाण, श्री उदय मंमगांई राठी, श्री सुरेन्द्र सिंह रावत सुरू भाई, श्री सुरेन्द्र सिंह रावत लाटु, श्री धीरेन्द्र बर्तवाल, श्री अनोप सिंह नेगी खुदेड़, श्री गोविन्द रात पोखरियाल साथी, श्रीमती ममता रावत, श्री प्रवीण सिंह रावत बढियारगढी, श्री सुनील सिन्दधववाल, श्री हरीश मंमगांई, श्री मनोज बिष्ट, श्री नवीन बहुगुणा समेत कई गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था। जिसमें कई कवियों ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार श्री दिनेश ध्यानी ने किया।



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Garhwali-Kumauni Poetry Book
Title: Binsiri
Editor: Ashish Sundriyal, Anoop Singh Rawat
Co-Editor: Ramesh Hitaishi, Santosh Joshi
Publisher: Rawat Digital
ISBN No.: 978-81-945723-9-8
Edition: 2020 (First)
No. of Pages: 400
Cover Page: Atul Gusain ‘Jakhi’
Book Designer: Anoop Singh Rawat
Binding: Paperback (Perfect)
Website: www.rawatdigital.in

यह किताब ऑनलाइन उपलब्ध है-
https://www.paharibazar.com/product/binsiri-a-biggest-poetry-collection-of-garhwali-kumauni/

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